Monday, 10 September 2012



कलम की शक्ति

तलवार है मेरी कलम
औज़ार पाया है ऐसा मैंने
जो करता है सृजन-कार्य!
कलम!ऐसी है मेरी कलम
इतिहास!साहित्य सबकी रचना
एक तुमसे ही होती !

ऐ कलम!
तुम्हारे बिना कागज़ का क्या मोल
तेरे बिना कागज़ है बेजान
तेरे बिना दुनिया है नादान और अनजान!

कलम!ये कलम न मेरी हैं न तेरी
ये तो है सब का साथी!
आलस्य से बुद्धिमान बनाने वाली कलम!

क्रांति का आधार है ये कलम
आजादी की पुकार है ये कलम
चेतना की आवाज़ है ये कलम
वरदान हैं ये कलम!

ऐ कलम,
तू है प्रकाश लाती,
तू है सबके सुख-दुःख का साथी,
तू है सच्चा साथी!

अकेलेपन का साथी!
सच्चा दोस्त!बस एक ही-कलम!
सदाचार की स्थापना,तुमसे ही!

बिछरों को मिलानेवाला,दर्द को बाँटनेवाला,
ख़ुशी का इज्हार करनेवाला,सिर्फ कलम से ही!
स्याही तुम्हारा पैगाम है!
पैगाम है प्रेम का,बदलते समय का,
आन्दोलन का,शान्ति का,बन्धुत्व का,एकता की..

समाज की शक्ति है कलम की शक्ति,
न मेरी न तेरी,कलम है हम सब की शक्ति!


No comments:

Post a Comment