Saturday, 20 April 2013

बचपन की यादें


बचपन की यादें 

सुनहरे पल बिठाये हमनें..
नमकीन पल बिठाये हमनें..
रिश्ते की खुशबू महकती गयी |

जीवन हरियाली ही हरियाली सी थी,

जीवन इन्द्रधनुष जैसी रंगीन थी |

परन्तु भाग्य ने अपना चक्र बदला..


आया वह मोड़ जब जुदाई सहनी पड़ी..

रिश्ते की खुशबू घटने लगी |

जीवन सूखेपन सी लगने लगी..

जीवन के रंग मिटने लगी..
फिर भी,साहसी बने |
जुदा होकर भी आगे बढ़ते गए..

परन्तु फिर से,भाग्य ने अपना चक्र बदला | 


आयी मिलन की घडी..

लेकिन समय ने सब कुछ बदल दिया था..
रिश्ते की खुशबू हिचकिचाने लगी......

Wednesday, 6 March 2013

युवा पीढ़ी 


हूँ  मैं एक अधमरे समाज की;
युवा पीढ़ी कहते है मुझे|

जागृत समाज की में निष्क्रीय  प्रतिनिधि;
नैतिकता और सत्यता मूल्यों को पहचानते है हम;
परन्तु चुप रहते है झूटी व्यवस्थाओं  के आगे|

समय है मुखौटों को उतारने का;
विनम्रता से नम्रता का हाथ थामने का..
तभी अन्याय के लिए आवाज़ बुलंद कर पाएंगे..

Monday, 10 September 2012



कलम की शक्ति

तलवार है मेरी कलम
औज़ार पाया है ऐसा मैंने
जो करता है सृजन-कार्य!
कलम!ऐसी है मेरी कलम
इतिहास!साहित्य सबकी रचना
एक तुमसे ही होती !

ऐ कलम!
तुम्हारे बिना कागज़ का क्या मोल
तेरे बिना कागज़ है बेजान
तेरे बिना दुनिया है नादान और अनजान!

कलम!ये कलम न मेरी हैं न तेरी
ये तो है सब का साथी!
आलस्य से बुद्धिमान बनाने वाली कलम!

क्रांति का आधार है ये कलम
आजादी की पुकार है ये कलम
चेतना की आवाज़ है ये कलम
वरदान हैं ये कलम!

ऐ कलम,
तू है प्रकाश लाती,
तू है सबके सुख-दुःख का साथी,
तू है सच्चा साथी!

अकेलेपन का साथी!
सच्चा दोस्त!बस एक ही-कलम!
सदाचार की स्थापना,तुमसे ही!

बिछरों को मिलानेवाला,दर्द को बाँटनेवाला,
ख़ुशी का इज्हार करनेवाला,सिर्फ कलम से ही!
स्याही तुम्हारा पैगाम है!
पैगाम है प्रेम का,बदलते समय का,
आन्दोलन का,शान्ति का,बन्धुत्व का,एकता की..

समाज की शक्ति है कलम की शक्ति,
न मेरी न तेरी,कलम है हम सब की शक्ति!


Tuesday, 21 August 2012


अंजाना

मिलते है बिछड़ते है जीवन की राहों पर;
यही है दस्तुर दुनिया की ।

अंजान व्यक्ति हर किसी के रास्ते में आते-जाते हैं,
कोइ अपना हो जाता है तो कोइ अंजाना हो जाता है,
दूर होकर भी वह अपने पास होता ।

कोइ एक पल के लिये रुकता है तो कोइ सारी उम्र के लिये ।
समय ये कैसा है,कोइ खुशी दे जाता है तो कोइ गम ।

आते है जीवन में ऐसे भी लोग जो हमें सीख दे जाते हैं,
दुख के सहारे हमें छोड़कर ;खुशियाँ हमारी ले जाते हैं,
यही है दस्तूर दुनिया की..।

वो अंजाना था....
अंजाना है....
और अंजाना ही रहेगा....
यही है दस्तूर दुनिया की ।

Wednesday, 25 April 2012

पानी

पानी है जीवनदायिनी।
प्यासे को मोक्ष प्रदायिनी।
भौतिक संसार में पानी का न रहा महत्व,
भुल गये है कि पानी है जीवनदाता।
बिन पानी हमारा क्या होगा?
पानी की समाप्ति,संसार में मच जाएगी हाहाकार।
समय हुआ है पानी बचाने का,
अन्यथा पानी के बूंदों को तरसेंगे हर प्राणी।


समय हुआ है नारे लगाने का-
पानी व्यर्थ न करो।
पानी प्रदूषित न करो।
पानी बचाओ,पानी बचाओ।
पानी है तो घरती है।
पानी की रक्षा करना हमारा कतर्व्य है।